उद्धव ठाकरे पर महिला की टिप्पणी पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा- बोलने की स्वतंत्रता व अभिव्यक्ति की आजादी पूर्ण अधिकार नहीं

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा है कि संविधान के अनुच्छेद 19 में प्रदत्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पूर्ण अधिकार नहीं है। कोर्ट ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और उनके बेटे आदित्य ठाकरे के खिलाफ ट्विटर पर कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाली महिला को गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा देने से इनकार करते हुए यह टिप्पणी की। महिला के खिलाफ मुंबई और पालघर पुलिस ने मामला दर्ज किया है।

उद्धव और आदित्य पर अपमानजनक टिप्पणी करने का आरोप

हाईकोर्ट ने यह बात नई मुंबई निवासी सुनैना होली की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान कही। इसके साथ ही उसे गिरफ्तारी से राहत देने से इंकार कर दिया। सुनैना पर सोशल मीडिया पर 25 जुलाई से 28 जुलाई के बीच मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे व उनके बेटे आदित्य पर अपमानजनक टिप्पणी करने का आरोप है। जिसको लेकर,बीकेसी सायबर क्राइम, मुंबई व पालघर पुलिस ने मामला दर्ज किया है। हाईकोर्ट ने कहा कि यदि याचिकाकर्ता को महसूस होता है कि पुलिस उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनेवाली है, तो वे कोर्ट आ सकती है।

सुनैना ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की

मामले में गिरफ्तारी की आशंका को देखते हुए सुनैना ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। याचिका में सुनैना ने खुद के खिलाफ दर्ज किए गए मामले को रद्द करने की मांग की है और याचिका पर सुनवाई पूरी होने तक पुलिस को कड़ी कार्रवाई से रोकने का आग्रह किया है।

याचिकाकर्ता को गिरफ्तारी से राहत देने से इंकार

इस दौरान सरकारी वकील ने न्यायमूर्ति एस एस शिंदे व न्यायमूर्ति एमएस कार्णिक की खंडपीठ के सामने कहा कि यदि याचिकाकर्ता जांच में सहयोग करें और पुलिस स्टेशन में आए, तो हम उसे कम से कम दो सप्ताह गिरफ्तार नहीं करेंगे। पुलिस का उद्देश्य इस मामले की जांच को आगे बढ़ाना है। पुलिस ने सुनैना को दो नोटिस जारी किया था पर उसने इनका जवाब नहीं दिया। इस मौखिक आश्वासन के बाद कोर्ट ने याचिकाकर्ता को गिरफ्तारी से राहत देने से इंकार कर दिया।